जानिए ज्योतिष का प्रयोग कर शेयर बाजार में लाभ कैसे पायें
प्रायः कम समय में अधिक से अधिक धन कमा कर अर्जित करना और अपने सुख संसाधन को बढ़ाना सभी की सोच होती है और कई लोग इसमें सफल भी होते हैं और कई लोग पैसे गवां भी देते हैं। ऐसे में ज्योतिष के माध्यम से जानिए की शेयर बाजार से कैसे धन कमाया जाए।
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आइये ज्योतिष शास्त्रो से जानते हैं ज्योतिष की दृष्टि से किसी व्यक्ति विशेष के लिए शेयर बाजार लाभदायक व सफलतादायक होगा या नहीं।
यदि जन्मकुंडली में जन्म लग्न या चंद्र लग्न से भाव 3, 6, 10 या 11 में शुभ ग्रह हों और भाग्येश केंद्र या त्रिकोण में हो, तो जातक को अकस्मात् धन की प्राप्ति हो सकती है।
यदि भाव 1, 2, 5, 9, 10 या 11 में नीच या नीचांश के बिना धनेश और लग्नेश या धनेश और लाभेश या भाग्येश और दशमेश अथवा धनेश और पंचमेश का योग हो, तो जातक को लाॅटरी, शेयर, सट्टे से लाभ मिलता है।
लग्न से ग्रह भाव 1, 2, 5, 7, 8, 10 और 11 में हों तथा कहीं भी दो ग्रहों से अधिक की युति न हो, तो शेयर मार्केट या सट्टे से असीम धन की प्राप्ति की संभावना रहती है।
मकर का सूर्य से रहित चंद्र लग्न में हो, चतुर्थ और सप्तम में गुरु हो, अस्त नीच और नीचांश रहित शनि शुभ स्थान में हो, तो भी अकस्मात् धन प्राप्ति के योग बनते हैं।
मेष लग्न की कुंडली में लग्न से चतुर्थ भाव में गुरु, सप्तम में शनि, अष्टम में शुक्र, नवम में गुरु, दशम में मंगल तथा पंचम में चंद्र हो, तो लाॅटरी, शेयर या सट्टे से धन लाभ के योग बनते हैं।
प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव में शुभ बली ग्रह हों तो शेयर या सट्टे से धन प्राप्ति के योग बनते हैं।
पंचम भाव में गुरु और लग्नेश हों तो अनायास धन प्राप्ति के योग बनते हैं।
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यदि कुंडली के पंचम भाव में चंद्र हो और उसे शुक्र देख रहा हो तो उस स्थिति में भी जातक को अनायास धन की प्राप्ति होती है।
कर्क लग्न की जन्मकुंडली में अष्टम भाव में कुंभ राशिस्थ बुध और शुक्र हों और किसी शुभ भाव में चंद्र तथा मंगल की युति हो, तो उस स्थिति में भी अकस्मात् धन प्राप्ति की संभावना रहती है।
यदि सिंह लग्न की कुंडली में लग्न में पूर्ण चंद्र और सप्तम में शनि हो तथा एकादश में गुरु और मंगल का योग हो, तो भी अकस्मात् धन लाभ की संभावना रहती है।
मीन लग्न की कुंडली में 5वें भाव में बुध या 11वें भाव में शनि हो, तो लाॅटरी, शेयर या सट्टे से लाभ की संभावना रहती है।
यदि कुंडली में पंचमेश और लग्नेश का योग हो या लग्नेश बली हो और राहु व बुध कारक हों, तो अकस्मात् धन प्राप्ति की संभावना रहती है।
दो ग्रहों का एक राशि में योग हो तथा दोनों 5 अंश से कम पर हों तो धन लाभ के उत्तम योग बनते हैं।
ज्योतिषिय गणनाओं के अनुसार जब धनेश और लाभेश चतुर्थ भाव में हों और चतुर्थ भाव का स्वामी शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो अकस्मात् धन की प्राप्ति हो सकती है।
शेयर, लॉटरी या सट्टे से धन कमाने के इच्छुक लोगों को चांदी की अंगूठी में शुद्ध लहसुनिया रत्न पहनना चाहिए।
अपने नामांक, मूलांक और भाग्यांक की तरह ही कंपनी का मूलांक, भाग्यांक तथा नामांक निकालकर मैत्री चक्र के आधार पर उनके संबंधों का निर्णय करके लाभप्रदता की स्थितियों का निर्णय व निर्माण कर सकता है।
इन अंकों के मध्य अधिक शत्रुतापूर्ण संबंध आर्थिक हानि को दर्शाते हैं। और यदि इन अंकों के मध्य एक से अधिक संबंध हों तो व्यक्ति को इस कंपनी के शेयरों से न तो अधिक लाभ होगा और न ही अधिक हानि ।
यहां यह बात हमें नहीं भूलनी चाहिए कि यदि द्वादशेश, अष्टम स्थान में स्थित हो या षष्ठेश अष्टम भाव में स्थित हो तो विपरीत राजयोग का निर्माण हो जाता है, परंतु इसका तात्पर्य यह है कि जातक को अष्टम भाव से संबंधित अशुभ फल नहीं मिलेंगे अर्थात् जातक को अष्टम भाव से संबंधित शुभ फल से कम परिश्रम द्वारा अधिक धन की प्राप्ति इस प्रकार, शेयर बाजार जैसे लाभ की भी प्राप्ति नहीं होगी अर्थात् जिसकी कुंडली में द्वादशेश या षष्ठेश या दोनों अष्टम भाव में स्थित हो जाएं तो ऐसे व्यक्ति को शेयर बाजार में कभी भी निवेश नहीं करना चाहिए, अन्यथा लाभ की अपेक्षा हानि की संभावना ही अधिक रहेगी। इसके अतिरिक्त यदि षष्ठेश पंचम भाव में राहु के साथ स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति को शेयर बाजार में अकस्मात् धन प्राप्ति की संभावना अधिक रहती है।
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यह जानने के लिए लग्नेश, धनेश व चंद्र की स्थिति का अध्ययन करना चाहिए। तीनों का शुभ योग धन मिलने की संभावना को बढ़ाता है। ज्योतिष गणना अनुसार चतुर्थ भाव से आगे चंद्र व सूर्य हों तो धन कठिनता से वापस मिलता है। उक्त योगों के साथ-साथ शुभ मुहूर्त व नक्षत्रों का विश्लेषण भी करना चाहिए। मंगलवार को दिया गया ऋण शीघ्रता से वापस नहीं आता है। क्रय-विक्रय में तीनों पूर्वा, विशाखा, कृत्तिका, आश्लेषा और भरणी (कुंभ लग्न, रिक्ता तिथि, मंगलवार) वर्जित हैं। अतः क्रय-विक्रय हमेशा शुभ चंद्र के योग में करना चाहिए।
प्रायः लग्नेश का संबंध जिन वस्तुओं से हो, जातक को उन वस्तुओं के व्यापार करने वाली कंपनियों के शेयर खरीदने चाहिए। जैसे किसी व्यक्ति का मकर या कुंभ लग्न है तो लग्नेश शनि होगा अर्थात् ऐसे व्यक्ति को शनि से संबंधित लोहे, पेट्रोल, केरोसीन, कोयला, खान से संबंधित उत्पादित वस्तुओं का कार्य करने वाली कंपनियों जैसे स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, रिलायंस पेट्रो केमिकल्स तथा उत्खनन का कार्य करने वाली कंपनी के शेयरों से लाभ होने की संभावना अधिक होती है।
ज्योतिष शास्त्र अनुसार इसके अतिरिक्त लग्न के अंश और राशि के आधार पर नक्षत्र स्वामी से संबंधित ग्रह का चुनाव करके उससे संबंधित वस्तुओं का व्यापार करनेवाली कंपनियों का शेयर खरीदना भी लाभप्रद हो सकता है। ऐसे ग्रह से संबंधित वस्तुओं के व्यापार करने वाली कंपनियों का चुनाव करें जो कुंडली में सबसे अधिक बलवान हो। योगकारक ग्रह से संबंधित वस्तु का व्यापार करने वाली कंपनी का शेयर खरीदना अधिक लाभप्रद होगा। जैसे मकर लग्न के लिए शुक्र योगकारक होगा तो ऐसे व्यक्ति को व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक्स, सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों की कंपनी, आभूषण, हीरे का व्यापार करने वाली कंपनी का चुनाव किया जाना चाहिए। यदि अष्टमेश लग्न में स्थित हो और उच्च, स्वराशि, मूल त्रिकोण या मित्र की राशि में हो तो ऐसे ग्रह से संबंधित वस्तु का व्यापार करनेवाली कंपनी का चुनाव भी शेयर खरीदने के लिए किया जा सकता है।
कल जानिए
सभी ग्रहों से संबंधित ग्रहों की वस्तुओं को जान जाएं तो उस ग्रह से संबंधित होरा में कंपनी के शेयर को शुभ चैघड़िया का प्रयोग करते हुए हम खरीद कर अधिक लाभ कमा सकते हैं।
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ज्योतिर्विद श्यामा गुरुदेव
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